जीवन क्षणभंगुर है। कोई पता नहीं मौत किस वक्त कहाँ और किस हालत में आ जाये। इसलिये गफ़लत को त्यागकर प्रभु से मिलाप के असल मकसद की ओर ध्यान देना चाहिये। शरीर की कोई बुनियाद नहीं है। यह वह शोला है जो पल भर मे बुझ जाता है।
मौत के शिकारी के जाल से कोई नहीं बच सकता। आप चाहते है आप की सब इच्छाएँ पूरी हो जाये। जरा सोचकर देख, अगर तेरी सब इच्छाएँ पूरी हो जाये, तेरा संसार, चाँद सूरज पर हुक्म (सिक्का) चलने लगे, सारा जहान तेरा गुलाम बन जाये तो भी आपको इससे कुछ हासिल न होगा क्योकि एक दिन आपको दुनिया को छोड़ कुच करना होगा।
जितना बड़ा इन्सान का लोभ होता है, उतनी ही बड़ी उसकी निराशा और असफलता होती है, पक्षी दाने के लालच में जाल में फँस जाता है। जितनी अधिक धन-दौलत होती है, उतना ज्यादा इन्सान दुःखों के जाल में फँसता है। लोभी को सारे संसार की धन-दौलत और राज-पाट भी मिल जाये तो भी उसकी लालसा शान्त नही होती।
जिन्दगी की डोरी बहुत छोटी है। आप लम्बी आशाएँ छोड दो क्योकि ये पिंजरे और जाल का काम करती है।